






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 3 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।
शब्दों से निकल कर सड़कों पर आया तनाव, सर्मथन बन रहा है उन्माद, इसे रोकों नेताजी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों के बीच कोई तनाव हो या ना हो, सर्मथकों के बीच खासा तनाव बढ़ रहा है। अपने-अपने नेता के लिए आपस में भिड़ने को तैयार से नजर आने वाले सर्मथक इतने दिनों तक तो सोशल मीडिया पर, फोन पर आपस में शब्दों के माध्यम से ही एक दूसरे तक यह तनाव पहुंचा रहे थे। लेकिन अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है यह तनाव शब्दों से निकल कर सड़कों तक पहुंच रहा है। मंगलवार को भाजपा के रोड शो के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी का पोस्टर फाड़ना हो या निर्दलीय एवं भाजपा सर्मथकों की आमने-सामने की नारेबाजी हो, भाजपा का रोड शो समाप्त होने के दौरान घुमचक्कर पर माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा की गई नारेबाजी हो या चाहे सोमवार रात को निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति शर्मा की सभा में पहुंच कर गाड़ी के प्रेशर होर्न से खलल डाल कर अपने नेता के जयकारे लगाने हो, चाहे चार दिन पूर्व में भाजपा के नुक्कड़ नाटकों के दौरान माकपा कार्यकर्ताओं की नारेबाजी हो। सर्मथकों को सड़कों पर आमने-सामने भिड़ जाने के दृश्य अब लगातार सामने आ रहे है। विडम्बना की बात यह है कि श्रीडूंगरगढ़ की संस्कृति ये नहीं है। स्पष्ट रूप से यहां का इतिहास स्वस्थ चुनाव व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए प्रसिद्ध रहा है। ऐसे में नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने अपने सर्मथकों के बढ़ते उन्माद को रोकें। चर्चा यही है कि इस तनाव का सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया पर की जा रही बेमतलब की बहसबाजी बन रही है जिससे ये स्वयंभू समर्थक अपने ही नेताओं को नुकसान पहुंचाने से भी बाज नहीं आ रहें है। नेताओं को अब इन पर नियंत्रण करने की रणनीति भी प्रभाव में लानी होगी और अपने आप में डैमेज इन समर्थकों को कंट्रोल करना होगा। क्योंकि इन अंधसर्मथकों की नेतागिरी की नकारात्मक चर्चाओं से नेता को वोटों का नुकसान होने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
पॉजिटिव व नेगेटिव रिपोर्टिंग के झमेले में फंसे, ना निगलते बने, ना उगलते।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंगलवार को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जब श्रीडूंगरगढ़ पहुंचे तो कहने को यह केवल पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार था। परंतु अंदरखाने की खबर यह है कि इस बार पार्टी के टिकट के अन्य दावेदार नेताओं की पॉजिटिव व नेगेटिव रिपोर्टिंग भी ऊपर तक हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्थानीय प्रत्याशी के कंधे पर हाथ रख कर इसका संदेश भी दे दिया। अब दूसरे अनेक नेता इस फेर में फंस गए है कि क्या करें और क्या ना करें.? चर्चा है कि पार्टी में भीतरघात की चर्चाएं जो चल रही है उनके कारण ही पार्टी के आलाकमान ने हर हाल में सीट निकालने का संदेश स्थानीय नेताओं को दिया है। ऐसे में असमंजस है कि प्रत्याशी से नाराज भी है और साथ भी खड़े है। समय भी अब निर्णायक आ गया है ऐसे में बड़ी दिक्कत रिपोर्टिंग बन गई है कि ये रिपोर्टिंग ऊपर तक भी पहुंच रही है। ऐसे में स्थिति यही है कि ना निगलते बन रहा है और ना उगलते।
सड़कों पर सर्मथन के सैलाब के बीच गुरिल्ला यौद्धाओं की भी चर्चा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंगलवार को श्रीडूंगरगढ़ की सड़कों पर सर्मथन का सैलाब बहा। इस सैलाब से हंसिया हथौड़े वाली पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, सर्मथक खासे उत्साहित नजर आ रहें है। लेकिन दूसरी और फूल वाली पार्टी की भी खासी संख्या रही। ऐसे में चर्चा यही चल रही है कि फुल वाली पार्टी के सर्मथक गुरिल्ला यौद्धा है ये वोट दिखते कम है और मतपेटी में निकलते अधिक है। ओर तो ओर चुनाव के परिणामों का आंकलन रैलियों की संख्या बल के माध्यम से गिनती करने वाले राजनीतिक विश्लेषक भी इन चर्चाओं को बल दे रहे है। लेकिन ये तो चर्चाएं है, चर्चाओं का क्या, चलती रहती है।



