






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 दिसम्बर 2020। तहसील के एक गांव ने आज सामाजिक कुप्रथा को बंद कर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ना स्वीकार किया है। गांव बरजांगसर की चौपाल पर आज गांव के प्रति घर से घर के मुखिया को बुलाया गया व गांव के विकास में समर्थन मांगा गया। हालांकि कुछ पुरातनपंथी बुजुर्गों ने अपने तर्क दिए परन्तु लंबी चर्चा के बाद आखिर आम सहमति बनाने में बुद्धिशील ग्रामीण सफल हुए और पूरे गांव में मृत्युभोज, ओढावणी, नुता को आज से ही बंद कर दिया गया है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि रामनारायण सिद्ध ने बताया कि गांव में लंबे समय से ये चर्चा चल रही थी जिसे आज अमली जामा पहनाया गया। उन्होंने बताया कि गांव की सभी जातियों ने मिल कर ये निर्णय लिया और नियम तोड़ने वाले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गांव में इस बात पर सहमति बनाने के लिए प्रगतिशील ग्रामीणों ने वैज्ञानिक तर्क दिए, कानूनों की व्याख्या की और विरोध कर रहें ग्रामीणों को समझाया। पूर्व सरपंच श्रवणनाथ, पूर्व सरपंच अर्जननाथ, मास्टर चतुर्भुज स्वामी, राजूनाथ, रेवंतना रामूराम सिहाग ने विचार व्यक्त किए और सभी ग्रामीणों को निर्णय के समर्थन में मना लिया। बता देवें गांव के राजपूत, मेघवाल, नायक परिवारों ने पहले ही इस संबंध में निर्णय लेकर इन पर पाबंदी लगा दी थी व आज सभी जाट, सिद्ध, ब्राह्मण, स्वामी, सोनी, लुहार परिवारों ने भी इस निर्णय को स्वीकार कर लिया और लिखा पढ़ी कर ली गई। सभी मुखियाओं ने अपने परिवार की जिम्मेदारी लेते हुए दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। सरपंच रूकमा देवी ने इस निर्णय के लिए ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।



